इंदौर। धर्म नगरी इंदौर की पुण्य धरा नेमीनगर जैन कॉलोनी के घूंघट गार्डन स्थित सन्मति समवशरण में शनिवार को इंद्रध्वज महामंडल विधान का आगाज आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज संघ के सानिध्य में हुआ। इंद्र-इंद्राणी सहित विधान के सभी पात्रों समेत श्रावक श्राविकाओं ने पुण्यलाभ अर्जित किया। इंद्रध्वज महामंडल विधान में अभिषेक, शांतिधारा हुई। शांतिधारा आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के मुखारविंद से करवाई गई उन्होंने मंत्र उच्चारण कर शांतिधारा संपूर्ण कराई। इससे पूर्व कार्यक्रम में मंडप उद्घाटन और ध्वजारोहण किया गया। ध्वजारोहण का पुण्य अर्जन का सौभाग्य अपने जन्मदिन के अवसर पर नरेंद्र वेद परिवार ने लिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दिगंबर जैन समाज के श्रावक श्राविकाएं और गुरु भक्त मौजूद रहे आचार्य श्री सुनील सागर जी महाराज के मंगल आशीर्वाद के साथ विधान का प्रथम सत्र संपन्न हुआ।

तीन दीदियों ने ली जैनेश्वरी दीक्षा, आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने प्रदान किया संयम मार्ग
धर्म नगरी इंदौर की पुण्य धरा नेमीनगर में शनिवार को वैराग्य और त्याग का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। चतुर्थ पट्टाधीश प्राकृताचार्य श्री 108 सुनीलसागर जी महाराज के पावन सानिध्य में भव्य जैनेश्वरी दीक्षा समारोह धर्ममय वातावरण में संपन्न हुआ।सन्मति समवशरण में इस समारोह में तीन मुमुक्षु आत्माओं ने सांसारिक बंधनों को त्याग कर आत्मकल्याण के मार्ग पर कदम रखा। सुमित्रा दीदी, जयश्री दीदी और निर्मला दीदी ने जैनेश्वरी दीक्षा अंगीकार की। जैसे ही तीनों दीदियों ने संयम का वेष धारण किया, पंडाल में मौजूद हजारों श्रावक-श्राविकाओं ने "अहिंसा परमो धर्म" और जय-जयकारों से आकाश गूंजा दिया। कई लोगों की आंखें इस वैराग्यमयी क्षण को देखकर नम हो गईं।
आचार्य श्री ने दिया त्याग का संदेश
इस अवसर पर धर्मसभा को संबोधित करते हुए आचार्य श्री सुनीलसागर जी महाराज ने कहा कि दीक्षा कोई साधारण घटना नहीं है, यह आत्मा का परमात्मा से मिलन है। जब व्यक्ति को संसार असार लगने लगता है और आत्मा के कल्याण की भावना जागृत होती है, तभी दीक्षा का भाव बनता है। ये तीनों दीदियां पूर्व भव के संस्कारों से आज इस मोक्षमार्ग पर अग्रसर हुई हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार सोने को तपाने पर ही उसकी चमक बढ़ती है, उसी प्रकार संयम की अग्नि में तपने से आत्मा शुद्ध होती है। आचार्य श्री ने कहा कि नेमीनगर की यह भूमि धन्य है, जहां से एक साथ तीन जीवों ने संयम मार्ग अपनाया है। यह पूरे समाज के लिए प्रेरणा है।
भक्ति संगीत और मंगल भावना
दीक्षा विधि के दौरान मंत्रोच्चार, भक्ति संगीत और णमोकार महामंत्र के जाप से पूरा वातावरण आध्यात्मिक हो गया था। दीक्षा के पश्चात तीनों नवदीक्षित जैनेश्वरी दीदियों को समाजजनों ने मंगल तिलक कर आशीर्वाद लिया। इंद्रपुरी चातुर्मास उत्सव कमेटी, नेमीनगर जैन कॉलोनी इंदौर एवं श्री सुनीलसागर युवा संघ, भारत द्वारा आयोजित इस समारोह में बड़ी संख्या में इंदौर सहित मालवा प्रांत के विभिन्न स्थानों से श्रावक-श्राविकाएं उपस्थित रहे। कार्यक्रम में इंद्रकुमार सेठी, देवेंद्र सेठी, टीके वेद, नरेंद्र वेद, प्रदीप पाटोदी, तल्लीन बड़जात्या भी उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संयोजन इंद्रपुरी चातुर्मास कमेटी द्वारा किया गया। अंत में सभी ने नवदीक्षित दीदियों के उज्ज्वल संयममय जीवन की मंगलकामना की और सकल समाज के कल्याण की प्रार्थना के साथ समारोह का समापन हुआ।




