इंदौर। कभी-कभी गुरु का आगमन केवल एक धार्मिक आयोजन का कारण नहीं बनता, बल्कि समाज में नई सोच और नई परंपरा की नींव भी रख देता है। इंदौर के परिवहन नगर जैन समाज में ऐसा ही परिवर्तन वर्ष 2025 में अंतर्मुखी मुनि श्री 108 पूज्य सागर महाराज के मंगल चातुर्मास के दौरान देखने को मिला। गुरु की प्रेरणा, समाज की श्रद्धा और समय की आवश्यकता ने बच्चों को जोड़कर एक धार्मिक बैंड को जन्म दिया, जो आज ‘महावीर उद्घोष’ के नाम से अपनी पहचान बना रहा है।
गुरु के आगमन से मिला नया विचार
परिवहन नगर समाज के अध्यक्ष नवनीत जैन बताते हैं कि गुरुओं के मार्गदर्शन से कई बार समाज को ऐसे विचार और अवसर मिलते हैं, जिनकी पहले कल्पना भी नहीं की गई होती। वर्ष 2025 में जब अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का मंगल चातुर्मास परिवहन नगर में तय हुआ, तब उनकी भव्य अगवानी की तैयारियां शुरू हुईं।
इसी दौरान विचार आया कि धार्मिक आयोजनों में बच्चों की सक्रिय भागीदारी भी होनी चाहिए। समाज के मार्गदर्शन और परिवारों के सहयोग से कम समय में बच्चों को तैयार किया गया और एक धार्मिक बैंड का स्वरूप सामने आया।
मूलनायक भगवान महावीर के नाम से मिली पहचान
परिवहन नगर मंदिर के मूलनायक भगवान महावीर के नाम पर बच्चों के इस बैंड का नाम ‘महावीर उद्घोष' रखा गया। बैंड ने पहली बार मुनि श्री पूज्य सागर महाराज की चातुर्मास अगवानी में अपनी प्रस्तुति देकर धर्म प्रभावना में सहभागिता की।
यह केवल वाद्ययंत्र बजाने तक सीमित पहल नहीं रही। इसके माध्यम से बच्चों को मंदिर, गुरु, धार्मिक आयोजन और समाज से जोड़ने का एक नया माध्यम भी तैयार हुआ।
परिवहन नगर से बाहर निकला तो मिली नई पहचान
बैंड की यात्रा का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव तब आया, जब अंतर्मुखी मुनि पूज्य सागर महाराज का चातुर्मास इंदौर इंस्टीट्यूट ऑफ लॉ में हुआ। चातुर्मास कलश स्थापना के अवसर पर पहली बार परिवहन नगर से बाहर जाकर बच्चों ने प्रस्तुति दी।
इस प्रस्तुति के बाद ‘महावीर उद्घोष बैंड’ की पहचान परिवहन नगर की सीमा से आगे बढ़ने लगी। बाद में आचार्य श्री 108 सुनीलसागर महाराज के सान्निध्य में राजवाड़ा पर आयोजित कार्यक्रम में भी बच्चों ने अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया।
बैंड बना धर्म से नई पीढ़ी को जोड़ने का माध्यम
धार्मिक आयोजनों में सामान्यतः बच्चों की भूमिका दर्शक या परिवार के साथ उपस्थित रहने तक सीमित दिखाई देती है। ‘महावीर उद्घोष बैंड’ ने इसमें एक नया आयाम जोड़ा। बच्चों को जिम्मेदारी मिली, अभ्यास का अवसर मिला और धार्मिक आयोजनों में उनकी सक्रिय भागीदारी बढ़ी।
बैंड में वर्णित जैन, सृष्टि जैन सहित अन्य बच्चे वाद्ययंत्र बजाकर अपनी प्रतिभा के माध्यम से धर्म प्रभावना में योगदान दे रहे हैं। इससे समाज में यह संदेश भी गया कि नई पीढ़ी को धर्म से जोड़ने के लिए केवल उपदेश ही नहीं, उनकी रुचि और प्रतिभा के अनुरूप मंच भी तैयार किए जाने चाहिए।
18 सितंबर को मिला सम्मान
कम समय में तैयार हुए इस बच्चों के धार्मिक बैंड की यात्रा को 18 सितंबर को एक और पहचान मिली। दिगम्बर जैन समाज नेमीनगर तथा दिगम्बर जैन महासमिति जूनियर महिला इकाई, नेमीनगर जैन कॉलोनी द्वारा ‘महावीर उद्घोष बैंड’ को सम्मानित किया गया।
नवनीत जैन इस उपलब्धि का श्रेय गुरु कृपा और समाज के सामूहिक सहयोग को देते हैं। उनके अनुसार, गुरु का सान्निध्य समाज को केवल धार्मिक संस्कार ही नहीं देता, बल्कि समाज के भीतर छिपी प्रतिभाओं को सामने लाने की प्रेरणा भी देता है।
गुरु प्रेरणा से पहल, समाज की सम्मति से सफलता
‘महावीर उद्घोष' की कहानी में गुरु प्रेरणा के साथ समाज की सम्मति और सामूहिक सहभागिता का भी विशेष महत्व है। किसी नई पहल को स्थायी स्वरूप तभी मिलता है, जब समाज उसे स्वीकार करे, परिवार सहयोग करें और बच्चों को आगे बढ़ने का अवसर मिले।
परिवहन नगर में शुरू हुई यह पहल बताती है कि धार्मिक आयोजनों में नई पीढ़ी को जिम्मेदारी और मंच देकर संस्कारों से जोड़ा जा सकता है। गुरु मार्ग दिखाते हैं, समाज उस विचार को स्वीकार करता है और नई पीढ़ी उसे अपने कौशल से आगे बढ़ाती है—‘महावीर उद्घोष' (बैंड) इसी सामूहिक यात्रा का उदाहरण बनकर सामने आया है।
बच्चों ने संभाली बैंड की कमान
‘महावीर उद्घोष' (बैंड)में वर्णित जैन,सृष्टि जैन, टीशा जैन, दर्शन जैन, आरव जैन, कृतज्ञ जैन, आरवी जैन, धुवि जैन, मोक्षिका जैन, आशी जैन, वेदीश जैन, मिताली जैन, गोरी जैन,अनु जैन,पलक जैन,दर्शन जैन,चीनू जैन सहित अन्य बच्चे वाद्ययंत्र बजाकर अपनी प्रतिभा के माध्यम से धर्म प्रभावना कर रहे हैं। नियमित अभ्यास और समाज के सहयोग से बच्चों ने कम समय में धार्मिक धुनों की प्रस्तुति देना सीखा। धार्मिक आयोजनों में उनकी सहभागिता ने दूसरे बच्चों और परिवारों को भी धर्म एवं समाज से जुड़ने की प्रेरणा दी।




