मुरैना। भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक के पावन अवसर पर आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि संसार में सच्चे गुरु से बढ़कर कोई मार्गदर्शक नहीं है। गुरु जीव को संसार के बंधनों से मुक्त होकर मोक्ष के मार्ग पर आगे बढ़ने की दिशा प्रदान करते हैं। आचार्यश्री ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ ने कठोर तप, संयम और आत्मसाधना के माध्यम से आठों कर्मों का क्षय कर केवलज्ञान प्राप्त किया और मोक्ष पद को प्राप्त हुए। उनका जीवन संदेश देता है कि प्रत्येक आत्मा में परमात्मा बनने की क्षमता है, आवश्यकता केवल सही दिशा, संयम और पुरुषार्थ की है। उन्होंने पिंजरे में बंद पक्षी का उदाहरण देते हुए कहा कि जब तक पक्षी बंधन में है, तब तक वह स्वतंत्र होकर उड़ नहीं सकता। इसी प्रकार आत्मा भी कर्मों के बंधन में होने के कारण संसार में जन्म-मरण के चक्र में भटकती रहती है। कर्मों का क्षय होने पर आत्मा अपने शुद्ध स्वरूप को प्राप्त कर मोक्ष की ओर अग्रसर होती है।

गुरु के उपदेशों को केवल सुनना पर्याप्त नहीं

आचार्यश्री ने कहा कि गुरु हमें इसी मुक्ति का मार्ग दिखाते हैं। गुरु के उपदेशों को केवल सुनना पर्याप्त नहीं, बल्कि उन्हें जीवन में उतारना आवश्यक है। भगवान पार्श्वनाथ की आराधना तभी सार्थक है, जब हम राग-द्वेष, क्रोध, मान, माया और लोभ जैसे विकारों को दूर करने तथा आत्मशुद्धि एवं कर्म निर्जरा के लिए पुरुषार्थ करें।उन्होंने कहा कि मोक्ष कल्याणक केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं, बल्कि आत्मचिंतन का पर्व है। भगवान के निर्वाण की स्मृति हमें संयम, त्याग, तप और आत्मचिंतन को जीवन में अपनाने की प्रेरणा देती है।

भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से लें आत्मकल्याण की प्रेरणा

मोक्ष सप्तमी के अवसर पर मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज ने कहा कि भगवान पार्श्वनाथ का जीवन प्रत्येक जीव को आत्मकल्याण की प्रेरणा देता है। भगवान के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित करना तभी सार्थक है, जब हम अपने जीवन से राग-द्वेष और अन्य विकारों को कम करने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि मोक्ष कर्मों से मुक्ति का नाम है और कर्मनिर्जरा संयम, तप, त्याग एवं आत्मचिंतन से होती है। हमें भगवान पार्श्वनाथ के जीवन से प्रेरणा लेकर आसक्ति को कम करते हुए आत्मा के शुद्ध स्वरूप को पहचानने का प्रयास करना चाहिए। यही मोक्ष सप्तमी पर्व की वास्तविक सार्थकता है।

मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित

मुकुट सप्तमी के पावन अवसर पर आचार्यश्री उदारसागरजी महाराज के ससंघ सान्निध्य एवं मुनिश्री उपशांत सागरजी महाराज के पावन निर्देशन में भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक महोत्सव श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ मनाया गया। निर्वाण लाडू महोत्सव में विद्वान नवनीत जैन शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ धार्मिक क्रियाएं विधि-विधानपूर्वक संपन्न कराईं। भगवान पार्श्वनाथ के अभिषेक का सौभाग्य राजेंद्र-अतुल जैन दयेरी परिवार, शांतिधारा का सौभाग्य डालचंद-निखिलकुमार तथा अजय-श्रेयांस जैन परिवार को प्राप्त हुआ। प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य शीला जैन एवं नीलेश-विजय जैन परिवार को प्राप्त हुआ।महोत्सव का शुभारंभ श्री जिनेंद्र प्रभु के अष्टद्रव्य पूजन से हुआ। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ के चरणों में निर्वाण लाडू अर्पित कर आत्मकल्याण एवं कर्मनिर्जरा का संकल्प लिया। बड़ी संख्या में समाजबंधुओं ने सहभागिता कर पुण्यार्जन किया।

नसियाजी जिनालय में भी हुआ आयोजन

मोक्ष सप्तमी के अवसर पर नसियाजी जिनालय में भी भगवान पार्श्वनाथ स्वामी के मोक्ष कल्याणक महोत्सव का आयोजन श्रद्धा एवं भक्तिभाव के साथ किया गया। भगवान के प्रथम अभिषेक का सौभाग्य महावीरप्रसाद-अनिलकुमार जैन परिवार तथा शांतिधारा का सौभाग्य महेशचंद्र-राकेशकुमार अझेडा वाले परिवार को प्राप्त हुआ। मोक्ष लक्ष्मी की कामना के साथ प्रथम निर्वाण लाडू अर्पित करने का सौभाग्य अभिषेक जैन ‘टीटू’, अनिकेत जैन एवं आलोक प्रेस परिवार को प्राप्त हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान पार्श्वनाथ की आराधना कर आत्मकल्याण एवं कर्मनिर्जरा की भावना के साथ धार्मिक अनुष्ठानों में सहभागिता की।