अयोध्या, उत्तर प्रदेश। गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ शिष्य एवं अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. जीवन प्रकाश जैन के 49वें जन्मदिवस पर उनके धार्मिक, शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक योगदान को स्मरण करते हुए उन्हें आदर्श युवा व्यक्तित्व बताया गया। उनके जीवन की यात्रा जैन संस्कृति, शिक्षा, शोध, साहित्य और धर्मप्रभावना से जुड़ी रही है। पढ़िए श्रीफल साथी अभिषेक अशोक पाटील की यह रिपोर्ट।

धार्मिक संस्कारों में हुआ जीवन निर्माण

डॉ. जीवन प्रकाश जैन का जन्म 26 अगस्त 1978 को भोपाल में एक धार्मिक परिवार में हुआ। उनके माता-पिता श्रीमती प्रेमलता जैन एवं श्री एल.सी. जैन हैं। उनका जीवन गणिनीप्रमुख आर्यिकाशिरोमणि श्री ज्ञानमती माताजी के मार्गदर्शन एवं संघ से जुड़कर धर्म, संस्कृति और समाजसेवा की दिशा में आगे बढ़ा।

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने ब्रह्मचर्य व्रत के साथ गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघ में प्रवेश किया। उनकी गृहस्थ बहन क्षुल्लिका श्री चंद्रमती माताजी भी धार्मिक साधना के क्षेत्र में समर्पित हैं।

शिक्षा और शोध के क्षेत्र में योगदान

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने होलकर विज्ञान महाविद्यालय, देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर से गणित विषय में एम.एससी. प्रथम श्रेणी से पूर्ण की। इसके बाद भोज मुक्त विश्वविद्यालय, भोपाल से भारतीय दार्शनिक ग्रंथों में गणितीय सामग्री के विश्लेषण विषय पर पीएचडी की।

उन्होंने इंदौर स्कूल ऑफ सोशल वर्क, डीएवीवी, इंदौर से मानव संसाधन विकास के लिए एक वर्षीय प्रबंधन पाठ्यक्रम भी प्रथम श्रेणी में पूरा किया।

जैन ग्रंथों का किया अध्ययन

गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के मार्गदर्शन में प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी से उन्होंने तत्वार्थ सूत्र, द्रव्यसंग्रह, रत्नकरंड श्रावकाचार, गोम्मटसार जीवकांड, नियमसार और पद्मनंदी पंचविंशतिका सहित अनेक जैन ग्रंथों का अध्ययन किया।

धार्मिक अध्ययन के साथ हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं पर उनकी पकड़ ने जैन दर्शन को व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

विदेशों में जैन धर्म की प्रभावना

डॉ. जीवन प्रकाश जैन को जैन धर्म की प्रभावना के लिए कई बार अमेरिका आमंत्रित किया गया। वर्ष 2007 में कैलिफोर्निया के जैन केंद्र के आमंत्रण पर उन्होंने दशलक्षण पर्व के अवसर पर विभिन्न केंद्रों में व्याख्यान दिए।

वर्ष 2015 में न्यूजर्सी में दशलक्षण पर्व के दौरान धर्मप्रभावना की। वर्ष 2022 में जैन सेंटर ऑफ नॉर्दर्न कैलिफोर्निया द्वारा उन्हें अतिविशिष्ट स्कॉलर के रूप में आमंत्रित किया गया, जहां उन्होंने लगातार 10 दिनों तक जैन धर्म के विभिन्न विषयों पर व्याख्यान दिए।

वर्ष 2024 में अटलांटा, वॉशिंग्टन डीसी और वर्जीनिया सहित विभिन्न जैन केंद्रों में धर्मप्रभावना की तथा वर्ष 2025 में पुनः न्यूजर्सी जैन सेंटर में आमंत्रित हुए।

साहित्य और प्रकाशन में उल्लेखनीय भूमिका

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने जैन साहित्य के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया है। लगभग 15 हजार जैन धार्मिक शब्दों से युक्त हिंदी-अंग्रेजी भगवान महावीर हिंदी-अंग्रेजी जैन शब्दकोष के संकलन में उन्होंने सहयोग किया।

उन्होंने गणिनी ज्ञानमती गौरव ग्रंथ, पार्श्वनाथ ग्रंथ, आचार्य भारतसागर गौरव ग्रंथ और प्रज्ञा पुंज सहित विभिन्न स्मारक ग्रंथों के संपादन में भूमिका निभाई।

जैन समाज की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका सम्यकज्ञान के संपादक के रूप में भी वे वर्षों से सेवाएं दे रहे हैं।

जैन संस्कृति के दस्तावेजीकरण में योगदान

पीठाधीश कर्मयोगी स्वस्तिश्री रवींद्रकीर्ति स्वामी जी के व्यक्तित्व पर प्रकाशित गौरविका तथा उनके 75वें हिरक जन्म जयंती अवसर पर प्रकाशित साहसिक व्यक्तित्व ग्रंथ के निर्माण में भी उनकी भूमिका रही।

दिगंबर जैन त्रिलोक संस्थान, जम्बूद्वीप की 50 वर्षों की उपलब्धियों और इतिहास को प्रस्तुत करने वाली स्वर्णिम सोपान स्मारिका का निर्माण भी उनके साहित्यिक एवं दस्तावेजी प्रयासों का हिस्सा रहा। इसके साथ ही शाश्वत तीर्थंकर जन्मभूमि अयोध्या पर महातीर्थ अयोध्या पुस्तक भी उनके महत्वपूर्ण कार्यों में शामिल है।

शिक्षा के क्षेत्र में भी सक्रिय

जैन धर्म के विभिन्न विषयों पर दो माह के ऑनलाइन जैन अध्ययन सर्टिफिकेट कोर्स का आयोजन किया गया, जिसमें भारत और विदेशों के हजारों अभ्यर्थियों ने रुचि दिखाई।

आर्यिका श्री चंदनामती माताजी की प्रेरणा से गणिनी ज्ञानमती दिगंबर जैन पत्राचार परीक्षा केंद्र के आयोजन में भी उन्होंने योगदान दिया।

राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में जिम्मेदार

अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में डॉ. जीवन प्रकाश जैन लंबे समय से सक्रिय हैं। 20 जनवरी 2013 को उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में मनोनीत किया गया। इसके बाद वर्ष 2016, 2018, 2020 और 2023 में भी उन्हें यह जिम्मेदारी प्रदान की गई।

युवा परिषद को आचार्यों, उपाध्यायों, मुनियों, आर्यिकाओं तथा गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी और प्रज्ञाश्रमणी आर्यिका श्री चंदनामती माताजी का मार्गदर्शन एवं आशीर्वाद प्राप्त होता रहा है।

अनेक संस्थाओं से जुड़े

डॉ. जीवन प्रकाश जैन अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, दिगंबर जैन त्रिलोक शोध संस्थान जम्बूद्वीप हस्तिनापुर के प्रबंध सचिव, तीर्थंकर ऋषभदेव तपस्थली तीर्थ प्रयाग के साथ जुड़े हुए हैं।

वे सतपथ फाउंडेशन चैरिटेबल ट्रस्ट, वडोदरा एवं अमेरिका के सलाहकारों में शामिल हैं। तीर्थंकर ऋषभदेव जैन विद्वत महासंघ के सदस्य, भारतवर्षीय दिगंबर जैन तीर्थक्षेत्र मुंबई के राष्ट्रीय मंत्री तथा भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष के रूप में भी सेवाएं दे रहे हैं। उत्तर प्रदेश जैन विद्या शोध संस्थान, लखनऊ से भी उनका जुड़ाव है।

अयोध्या और जम्बूद्वीप के महत्व को किया प्रचारित

डॉ. जीवन प्रकाश जैन ने अयोध्या के जैन धार्मिक महत्व को भी समाज के सामने रखा। उन्होंने बताया कि जैन धर्म में भगवान राम और सीता का भी महत्वपूर्ण स्थान है तथा अयोध्या जैन धर्म के तीर्थंकरों की जन्मभूमि के रूप में अत्यंत महत्वपूर्ण है।

जम्बूद्वीप हस्तिनापुर के प्राचीन महत्व को जन-जन तक पहुंचाने और जैन धर्म के परिप्रेक्ष्य में उसके धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व को प्रचारित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

युवाओं के लिए प्रेरणादायी व्यक्तित्व

धर्म, शिक्षा, शोध, साहित्य, संगठन और समाजसेवा के विभिन्न क्षेत्रों में सक्रिय डॉ. जीवन प्रकाश जैन को समय-समय पर आदर्श युवा, प्रज्ञाभूषण, समाज गौरव जैसी विभिन्न उपाधियों से सम्मानित किया गया है।

उनकी भविष्य की योजनाओं में हिंदी एवं अंग्रेजी में जम्बूद्वीप दर्शन जैसे साहित्यिक कार्यों का संकलन, जैन धर्म के सिद्धांतों को वैज्ञानिक एवं तार्किक दृष्टि से नई पीढ़ी तक पहुंचाना तथा जैन समाज की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं विकास के लिए कार्य करना शामिल है।

49वें जन्मदिवस पर मंगलकामनाएं

अभिषेक पाटील ने कहा कि डॉ. जीवन प्रकाश जैन जैसे व्यक्तित्व युवाओं के लिए प्रेरणा हैं। उनका जीवन ज्ञान, धर्म, संगठन, साहित्य और समाजसेवा के समन्वय का उदाहरण है।

49वें जन्मदिवस पर उनके यशस्वी, उज्ज्वल, धार्मिक एवं सामाजिक जीवन की मंगलकामना की गई। साथ ही उनके माता-पिता और गुरुजनों के चरणों में श्रद्धापूर्वक नमन करते हुए समाज एवं धर्म के लिए उनके योगदान की निरंतरता की कामना की गई।

पूरी न्यूज का सार — 5 पॉइंट

लोकेशन: अयोध्या, उत्तर प्रदेश | श्रीफल साथी: अभिषेक अशोक पाटील

डॉ. जीवन प्रकाश जैन को 49वें जन्मदिवस पर धार्मिक, शैक्षणिक, साहित्यिक एवं सामाजिक क्षेत्र में योगदान के लिए आदर्श युवा व्यक्तित्व बताया गया।

गणिनीप्रमुख श्री ज्ञानमती माताजी के संघस्थ शिष्य के रूप में उन्होंने जैन दर्शन, ग्रंथ अध्ययन और धर्मप्रभावना को जीवन का महत्वपूर्ण आधार बनाया।

अमेरिका सहित विभिन्न देशों में जैन धर्म की प्रभावना के साथ उन्होंने जैन साहित्य, शोध, संपादन और प्रकाशन के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया।

अखिल भारतवर्षीय दिगंबर जैन युवा परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष सहित विभिन्न संस्थाओं में जिम्मेदारी निभाते हुए वे जैन संस्कृति और युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।