इंदौर, 2 सितंबर 2026। देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर एवं कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ, इंदौर के मध्य जैन दर्शन एवं विद्या, प्राकृत भाषा एवं साहित्य, भारतीय ज्ञान परम्परा, शिक्षा, अनुसंधान, प्रशिक्षण, नवाचार, प्रकाशन तथा समाजोपयोगी एवं विस्तार गतिविधियों में पारस्परिक सहयोग स्थापित करने के उद्देश्य से समझौता ज्ञापन (MOU) निष्पादित किया गया।
शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग
MOU का प्रमुख उद्देश्य दोनों संस्थाओं के बीच शैक्षणिक एवं अनुसंधानात्मक सहयोग को सुदृढ़ करना तथा जैन दर्शन, प्राकृत भाषा एवं भारतीय ज्ञान परम्परा से संबंधित ज्ञान को व्यापक स्तर पर प्रसारित करना है। इसके अंतर्गत शिक्षण, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाएगा।
शिक्षा और कौशल विकास के अवसर
दोनों संस्थाएँ प्रमाणपत्र, डिप्लोमा, डिग्री, शोध, अल्पकालीन, कौशल विकास एवं मूल्यवर्धित कार्यक्रमों के संचालन में सहयोग करेंगी। विद्यार्थियों, शोधार्थियों, शिक्षकों एवं विषय-विशेषज्ञों के शैक्षणिक आदान-प्रदान को भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
संयुक्त शोध और प्रकाशन
समझौते के अंतर्गत संयुक्त अनुसंधान परियोजनाओं, नवाचार और ज्ञान-सृजन को बढ़ावा दिया जाएगा। राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सम्मेलन, संगोष्ठी, कार्यशाला, व्याख्यानमाला एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। संयुक्त शोध परियोजनाओं, पुस्तकों की सामग्री तथा अन्य प्रकाशनों के विकास में भी सहयोग किया जाएगा।
पाण्डुलिपियों का संरक्षण और डिजिटलीकरण
भारतीय ज्ञान परम्परा, जैन साहित्य एवं पाण्डुलिपियों के संरक्षण, डिजिटलीकरण एवं प्रसार के क्षेत्र में विशेष सहयोग किया जाएगा। दोनों संस्थाएँ पारस्परिक सहमति से शैक्षणिक कार्यक्रम एवं प्रशिक्षण पाठ्यक्रम भी संचालित करेंगी।
संसाधनों का पारस्परिक उपयोग
दोनों संस्थाएँ अपने उपलब्ध पुस्तकालय, पाण्डुलिपि संग्रह, अभिलेखागार, संग्रहालय, डिजिटल संसाधनों एवं अन्य अधोसंरचना का शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए पारस्परिक रूप से उपयोग कर सकेंगी। विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों के आदान-प्रदान, इंटर्नशिप एवं अध्ययन भ्रमण को भी बढ़ावा दिया जाएगा।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सहयोग
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं, उद्योगों, CSR एवं शासकीय एजेंसियों के सहयोग से विभिन्न शोध एवं विकास परियोजनाएँ संचालित करने तथा पारस्परिक सहमति से अन्य शैक्षणिक, अनुसंधान एवं विस्तार गतिविधियाँ संचालित करने का भी प्रावधान किया गया है।
पदाधिकारी रहे उपस्थित
इस अवसर पर देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. राकेश सिंघई, कुलसचिव प्रो. प्रज्ज्वल खरे, जैन स्टडीज सेंटर के निदेशक प्रो. रजनीश जैन एवं सह-निदेशक प्रो. राहुल सिंघई तथा कुन्दकुन्द ज्ञानपीठ के अध्यक्ष इंजी. अमिल कासलीवाल, ट्रस्टी आदित्य कासलीवाल, सचिव डॉ. अरविन्द कुमार जैन एवं ‘सिरि भूवलय’ शोध परियोजना के निदेशक इंजी. अनिल कुमार जैन सहित संबंधित पदाधिकारी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
जैन ज्ञान परम्परा को मिलेगी गति
यह MOU जैन दर्शन, प्राकृत भाषा, भारतीय ज्ञान परम्परा एवं प्राचीन पाण्डुलिपियों के संरक्षण को आधुनिक शैक्षणिक एवं अनुसंधान गतिविधियों से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। इससे विद्यार्थियों, शोधार्थियों एवं शिक्षकों को अध्ययन एवं शोध के नए अवसर मिलेंगे तथा जैन ज्ञान परम्परा के संरक्षण एवं प्रसार को नई गति मिलेगी।




