अलवर। मिशन सच की ओर से क्षमावाणी पर्व पर प्रकाशित ‘क्षमावाणी विशेषांक’ का विमोचन रविवार को जैन भवन, स्कीम नंबर-10 में जैन मुनि सौम्यसागर महाराज के सान्निध्य में किया गया। उपस्थितजनों ने विशेषांक की सामग्री की सराहना करते हुए क्षमा के व्यापक मानवीय संदेश को समाज तक पहुंचाने की आवश्यकता बताई।
क्षमा को मानवता से जोड़ने का प्रयास
विशेषांक में क्षमावाणी पर्व को किसी एक समुदाय तक सीमित न रखते हुए समूची मानवता से जोड़ने का प्रयास किया गया है। इसमें विभिन्न धर्मों और परंपराओं में क्षमा की अवधारणा तथा उसके महत्व को प्रस्तुत किया गया है।
अंक में कहा गया है कि क्षमा अहंकार, कटुता और वैमनस्य से दूर कर व्यक्ति को प्रेम, सद्भाव और आत्मशुद्धि की ओर ले जाती है।
अलवर की जैन विरासत पर विशेष सामग्री
विशेषांक में अलवर के जैन समाज के इतिहास, वर्तमान और धार्मिक-सामाजिक विरासत को विस्तार से स्थान दिया गया है। चातुर्मासरत जैन साधु-संतों, उनके प्रवास और धार्मिक गतिविधियों से संबंधित जानकारी भी शामिल की गई है।
‘अलवर की गलियों में कब से गूंज रहा है जिनवाणी का स्वर’ शीर्षक विशेष लेख के माध्यम से शहर की जैन धार्मिक परंपरा और उसके ऐतिहासिक विस्तार को रेखांकित किया गया है। अंक में बहरोज की जैन विरासत एवं तपस्या परंपरा के साथ तिजारा के प्राचीन जैन मंदिर की धार्मिक-सांस्कृतिक धरोहर का भी परिचय दिया गया है।
समाज को जोड़ने वाली पत्रकारिता
मिशन सच की टीम की ओर से राजेश रवि ने सभी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य केवल समाचार देना नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने वाले विषयों को भी सामने लाना है। क्षमावाणी विशेषांक धर्म, मानवता और सामाजिक सद्भाव को केंद्र में रखकर किया गया प्रयास है।
कार्यक्रम में सहभागिता
विमोचन अवसर पर अग्रवाल जैन समाज के अध्यक्ष मुकेश जैन, चातुर्मास कमेटी के संयोजक अभिषेक जैन, जैन समाज के अनेक सदस्य तथा मिशन सच से जुड़े लोग उपस्थित रहे।
सोशल मीडिया पोस्टर सार
अलवर में मिशन सच के क्षमावाणी विशेषांक का विमोचन।
मुनि सौम्यसागर महाराज के सान्निध्य में क्षमा, सद्भाव और जैन विरासत का संदेश।
विशेषांक ने विभिन्न धर्मों में क्षमा के महत्व को किया रेखांकित।




