आगरा। गुदड़ी मंसूर खां स्थित श्री शीतलनाथ दिगंबर जैन मंदिर में दशलक्षण महापर्व के आठवें दिन उत्तम त्याग धर्म की श्रद्धापूर्वक आराधना की गई। प्रातःकाल श्रद्धालुओं ने श्रीजी का अभिषेक, शांतिधारा एवं पूजन कर भगवान की आराधना की।

त्याग वस्तु का नहीं, मोह का हो

पंडित जी ने उत्तम त्याग धर्म की व्याख्या करते हुए कहा कि त्याग केवल वस्तुओं को छोड़ना नहीं, बल्कि उनके प्रति मोह और आसक्ति का त्याग करना है। आत्मकल्याण के मार्ग में बाधक विकारों को छोड़कर ही व्यक्ति अपने जीवन को संयम और धर्म की ओर ले जा सकता है।

श्रद्धालुओं ने उत्तम त्याग धर्म के संदेश को आत्मसात करते हुए जीवन में त्याग, संयम और आत्मकल्याण के भाव अपनाने का संकल्प लिया।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मोहा मन

सायंकाल मंदिर परिसर में सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। बच्चों एवं श्रद्धालुओं ने धार्मिक और सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर उपस्थित जनों का मन मोह लिया। मंगल आरती एवं पूजन के दौरान भी श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से सहभागिता की।

शांतिधारा का सौभाग्य

महेंद्र कुमार, जितेंद्र, प्रवेश कुमार, रविंद्र कुमार, पंकज जैन, देवेंद्र कुमार, गनवाला देवी, अशोक जैन, बिट्टू एवं कपिल जैन को शांतिधारा का सौभाग्य प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में सहभागिता

नरेश जैन, राकेश जैन, पार्षद प्रमोद जैन, वीरेन जैन, रविंद्र जैन, धर्मेश जैन, मोहित जैन, अभिषेक जैन, सुनील जैन, संजीव जैन, जितेंद्र जैन, व्यवस्थापक सुभाष जैन, सुशीला जैन, मिथिलेश जैन, अल्पना जैन, सुनीता जैन, शशि जैन एवं विजय जैन सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।

सोशल मीडिया पोस्टर सार

गुदड़ी मंसूर खां में उत्तम त्याग धर्म की भक्तिमय आराधना।

संदेश मिला—वस्तु नहीं, मोह और आसक्ति का त्याग करें।

सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से गूंजा शीतलनाथ जिनालय परिसर।