आगरा। रकाबगंज स्थित निर्मल सेवा सदन, छीपीटोला में पर्युषण महापर्व के दसवें दिन उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म के अवसर पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर का श्रद्धा, उत्साह और भक्तिभाव के साथ समापन हुआ।
शिविर में संतचर्या शिरोमणि आचार्य श्री 108 विशुद्धसागर जी महाराज के शिष्य मुनि श्री 108 समत्वसागर जी महाराज, मुनि श्री 108 शीलसागर जी महाराज एवं मुनि श्री 108 सुप्रभातसागर जी महाराज का पावन सान्निध्य प्राप्त हुआ। पंडित प्रदीप शास्त्री, दमोह के मार्गदर्शन में पूजन, अभिषेक एवं शांतिधारा संपन्न हुए।
निर्वाण लाडू और 1008 दीपकों से आरती
मंगलाचरण के अंतर्गत दीप प्रज्ज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट की गई। श्रद्धालुओं ने भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित कर भक्तिभाव से आराधना की।
संध्याकाल 1008 दीपकों से भव्य आरती की गई। दीपों की आभा और जिनेंद्र भक्ति से शिविर परिसर आध्यात्मिक वातावरण से भर उठा।
ब्रह्मचर्य को बताया आत्मस्वरूप का आश्रय
मुनि समत्वसागर महाराज ने प्रवचन में कहा कि एक लक्ष्य की प्राप्ति के बाद यदि दूसरा लक्ष्य सामने खड़ा हो जाए तो व्यक्ति की यात्रा अधूरी बनी रहती है। उत्तम ब्रह्मचर्य की साधना वह स्थिति है, जहां अन्य लक्ष्य स्वतः गौण हो जाते हैं और साधक निज आत्मस्वरूप का आश्रय ग्रहण करता है।
उन्होंने कहा कि ब्रह्मचर्य को केवल बाहरी त्याग के रूप में नहीं समझना चाहिए। वास्तविक ब्रह्मचर्य आत्मचेतना, संयम, निर्मल दृष्टि और स्वदार-संतोष जैसे सद्भावों से जुड़ा है।
युवाओं को आत्मबल बढ़ाने की प्रेरणा
मुनिश्री ने युवाओं को संयमित जीवन अपनाने का संदेश देते हुए कहा कि वासनाओं के पीछे शक्ति का अपव्यय नहीं करना चाहिए। आत्मसंयम, अध्ययन, सदाचार और धर्मसाधना के माध्यम से मनुष्य अपनी शक्ति को सुरक्षित रखकर आत्मिक उन्नति की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
उन्होंने कहा कि दृष्टि की निर्मलता, विचारों की पवित्रता और मर्यादित आचरण ही जीवन में यश, शांति एवं आत्मबल प्रदान करते हैं।
बड़ी संख्या में समाजजन रहे उपस्थित
मंच संचालन सतेंद्र जैन साहूला ने किया। इस अवसर पर श्रुत मंथन वर्षायोग समिति के रमेश जैन, मनोज जैन, मुकेश जैन, प्रवीन जैन पद्मावती, शैलेश जैन, मुकेश जैन लले, विवेक जैन, चक्रेश जैन, राजीव जैन, आशीष जैन बाबा, सतेंद्र जैन साहूला, दीपक जैन, रोहित जैन एवं सकल जैन समाज के सदस्य उपस्थित रहे।
एक नजर में
उत्तम ब्रह्मचर्य धर्म पर आत्मस्पंदन ध्यान शिविर का समापन हुआ।
मुनि समत्वसागर, शीलसागर एवं सुप्रभातसागर महाराज का सान्निध्य मिला।
भगवान वासुपूज्य के मोक्ष कल्याणक पर निर्वाण लाडू अर्पित हुआ।
संध्याकाल 1008 दीपकों से भव्य आरती की गई।
मुनिश्री ने आत्मबल, संयम एवं निर्मल दृष्टि अपनाने का संदेश दिया।
श्रीफल साथी : राहुल जैन, आगरा




