सीकर। आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने दंग की नसिया में हुई धर्म सभा में कहा कि मनुष्य जीवन का साध्य सिद्ध मुक्ति अवस्था है, जो रत्नत्रय धर्म, आस्था, साधना श्रद्धा से प्राप्त होती है। आचार्य श्री के सानिध्य में प्रातः काल से अनेक धार्मिक आयोजन हजारों धर्मावलंबियों की उपस्थिति में संपन्न हुए। रविवार को वात्सल्य बाल प्रतिभा संस्कार महोत्सव कार्यक्रम अंतर्गत जैन भवन सीकर से पाठशाला के हजारों बच्चों की शोभा यात्रा, ध्वजारोहण दीप प्रज्वलन, नृत्य मंगलाचरण आचार्य श्री के आशीर्वचन, पाठशाला के बच्चों की नाटिका सांस्कृतिक कार्यक्रम,अतिथियों के उद्बोधन, मुनिराज आर्यिका माताजी के प्रवचन,विद्या वर्धन संस्कार,आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन, जिनवाणी भेंट, पूजन, प्रथमाचार्य श्री शांतिसागर जी आचार्य प्रतिष्ठापना शताब्दी महोत्सव में आयोजित प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार वितरण महाआरती का कार्यक्रम हुआ।

खान-पान को नियंत्रित रखने की दी सलाह

नरेंद्र मोदी महामंत्री एवं अनुभव जैन ने बताया कि प्रातः काल जैन भवन से बाहर से आए पाठशाला के बच्चों की शोभायात्रा निकाली गई। जिसका समापन दंग की नसिया में हुआ। पुण्यार्जक परिवार द्वारा ध्वजारोहण, दीप प्रवज्जलन, आचार्य श्री के चरण प्रक्षालन , जिनवाणी भेंट पश्चात नृत्य मंगलाचरण हुआ। राजस्थान के टोंक, निवाई, शिवाड़, किशनगढ़, पारसोला, गामडी, जयपुर, धोद, जोबनेर, मारोठ, कुचामन सिटी अन्य राज्यों तथा दुबई ने नेहल चूड़ीवाल भी संस्कार शिविर के लिए आई। इस अवसर पर आचार्य धर्मसागर जी महाराज औषधालय के चिकित्सक डीसी जैन दिल्ली से विशेष रूप से उपस्थित हुए। उन्होंने संक्षिप्त उद्बोधन में खान-पान को नियंत्रित रखने से कैंसर ,डायबिटीज ,हार्ट अटैक से बचने के लिए उपयोगी सुझाव दिए।

संस्कारों से प्रतिभा निखरती है

आर्यिका श्री महायश मति ने उपदेश में बताया कि 8 वर्ष से 80 वर्ष के विद्यार्थियों का संस्कार शिविर में आना जीवन में संस्कारों का एवं धर्म के प्रति रुचि बताता है। जीवन में पहचान धन और सम्मान से नहीं संस्कारों से होती है। जिस प्रकार आप बच्चों को ट्यूशन के लिए लेकर जाते हैं वापस लेने जाते हैं। उसी प्रकार बच्चों को धार्मिक पाठशाला और मंदिर में माता-पिता के साथ ले जाना चाहिए। संस्कारों से प्रतिभा निखरती है।

चयनित प्रतियोगियों को सम्मानित किया

मुनि श्री चिंतन सागर जी ने कहा यह वर्तमान युग ज्ञान ,विज्ञान, सूचना ,सोशल मीडिया का है जीवन में सफलता के लिए समीचीन निर्मल ज्ञान जरूरी है जो सच्चे देव शास्त्र गुरु से प्राप्त होता है। मुनि श्री हितेंद्र सागर जी ने बताया कि 58 वर्ष की तप साधना में आचार्य श्री संस्कारों का आरोपण कर रहे हैं। धार्मिक संस्कारी मित्र से जीवन में उन्नति होती हैं। इस आयोजन के अनेक सहयोगियों का उल्लेख कर संस्कार शिविर की आगामी कार्य योजना बताई। प्रथमाचार्य शांति सागर जी महाराज आचार्य पद प्रतिष्ठपना शताब्दी महोत्सव की विभिन्न प्रतियोगिता के सफल चयनित प्रतियोगियों को मालवी परिवार सलूम्बर एवं अन्य द्वारा सम्मानित किया गया।

माता-पिता का सम्मान कर उनके उपकार न भूलें

डॉ.राजेश पंचोलिया के अनुसार आचार्य श्री वर्धमान सागर जी महाराज ने अपने उपदेश आशीर्वचन में बताया कि विद्या संस्कार वर्धन कार्यक्रम में विभिन्न पाठशाला के बच्चों ने नाटकीय प्रस्तुति दी। इसे जीवन में अपनाना चाहिए। गुरु की वाणी विनय से सुनकर ग्रहण करना चाहिए। मनुष्य जन्म भी कीमती अनमोल हीरे के समान कीमती है जैन धर्म में तीन कीमती रत्नत्रय रत्न है रत्नत्रय मुक्ति का मार्ग है। इससे आत्मा का कल्याण मोक्ष होता है। मनुष्य जीवन का साध्य मोक्ष साधना, श्रद्धा ,आस्था से प्राप्त होती है। सभी को माता-पिता का सम्मान कर उनके उपकार को भूलना नहीं चाहिए।पाठशाला सदगुण और संस्कार सिखाती है। कार्यक्रम में आचार्य श्री मुनि श्री हितेन्द्र सागर जी एवं संघ के साधुओं ने सभी बच्चों पर मंगल द्रव्यों से संस्कार किए।