संत परिचय

अमिट परंपरा छोड़ कर गए हैं : चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर के समाधि दिवस पर श्रद्धांजलि


प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, 5 मई को 34वां समाधि दिवस है। पढ़िए वात्सल्य वारिधि भक्त परिवार के राजेश पंचोलिया का विशेष आलेख…


इंदौर। प्रथमाचार्य चारित्र चक्रवर्ती आचार्य श्री शांति सागर जी गुरुदेव की अक्षुण्ण मूल बाल ब्रह्मचारी पट्ट परम्परा के चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य श्री अजित सागर जी का वैशाख शुक्ल पूर्णिमा, 5 मई को 34वां समाधि दिवस है। आचार्य श्री का जन्म फागुन शुक्ल 7 सप्तमी विक्रम संवत 1982 (वर्ष 1925) को श्रीचंद्र नाथप्रभु के मोक्ष कल्याणक पर मध्यप्रदेश आष्टा नगर के समीप भौरा ग्राम में श्रीमती रूपा देवी-श्री जवर चंद जी के चतुर्थ पुत्र के रूप में हुआ था। उनका लौकिक नाम राजमल रखा गया।

प्रथम गुरु दर्शन

18 वर्ष की अल्प आयु में उन्होंने वर्ष1943 में गुरुदेव श्री वीर सागर जी के दर्शन किये तथा संघ में प्रवेश की अनुमति लेकर संघ में प्रवेश किया। दो वर्ष में शास्त्रों का स्वाध्याय निरंतर चलता रहा।

व्रत प्रतिमा

झालरापाटन राजस्थान में 20 वर्ष की उम्र में 7 प्रतिमा तथा ब्रह्मचर्य व्रत के नियम आचार्य कल्प श्री वीर सागर जी से ग्रहण किये।

मुनि दीक्षा

आचार्य श्री वीर सागर जी की समाधि होने के कारण द्वितीय पट्टाधीश आचार्य श्री शिव सागर जी से मुनि दीक्षा हेतु श्रीफल भेंट कर निवेदन किया। विक्रम संवत 2018 कार्तिक सुदी ( वर्ष 1961) को सीकर, राजस्थान में मुनि दीक्षा ग्रहण कर श्री राजमल जी से मुनि श्री अजित सागर जी बन गए। मुनि श्री अजित सागर जी आचार्य श्री शिव सागर जी के साथ ही रहे।

आचार्य पद

तृतीय पट्टाधीश आचार्य श्री धर्म सागर जी की समाधि के पश्चात ज्येष्ठ शुक्ल,10 संवत 2044 (7 जून, 1987) उदयपुर में आपको चतुर्थ पट्टाधीश आचार्य पद दिया गया।

आचार्य पद का आज्ञा पत्र

आचार्य श्री अजित सागर जी ने स्वास्थ्य प्रतिकूल होने के कारण 31 जनवरी, 1990 को संघस्थ मुनि श्री वर्द्धमान सागर जी को अपने बाद परम्परा के आचार्य पद का संस्कृत में आज्ञा पत्र लिखा।

संल्लेखना

वैशाख शुक्ल पूर्णिमा संवत 2047 (वर्ष 1990) को आपकी समाधि हो गई।

मुनि शिष्यों की संख्या – 8

1. मुनि श्री हित सागर जी

2. मुनि श्री पुण्य सागर जी

3. मुनि श्री सौम्य सागर जी

4. मुनि श्री हेमंत सागर जी

5. मुनि श्री विराग सागर जी

6. मुनि श्री चिन्मय सागर जी

7. मुनि श्री कीर्ति सागर जी

आर्यिका की संख्या- 7

1. आर्यिका श्री अनंत मति जी

2. आर्यिका श्री सौम्य मति जी

3. आर्यिका श्री दक्ष मति जी

4. आर्यिका श्री सौरभ मति जी

5. आर्यिका श्री चैत्य मति जी

क्षुल्लकों की संख्या- 2

वर्षायोग – 29

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