आर्यिका पवित्रमति माताजी के ससंघ सानिध्य में 18 मार्च से 30 मार्च तक वो तेरह दिन मेरे जीवन के सबसे अच्छे, यादगार दिन रहे। उनके सानिध्य में कई विधान, अभिषेक, पूजन आदि कार्यक्रम हुए। सभी भक्तजन श्रद्धा और आस्था से डूबे रहे। पढ़िए डडूका से अजीत कोठिया की यह खबर…
डडूका। आर्यिका विज्ञान मति माताजी की शिष्या आर्यिका पवित्रमति माताजी के ससंघ सानिध्य में 18 मार्च से 30 मार्च तक वो तेरह दिन मेरे जीवन के सबसे अच्छे, यादगार दिन रहे। इसके साथ सुनहरे आध्यात्मिक पल एवं अपने अंतर्मन में झांकने के स्वर्णिम मौके बन गए। आंजना और बोरी से विहार कर जब 18 मार्च को माताजी जब अवलपुरा से पारंपरिक मार्ग से सुबह 8.30बजे यहां मंगल प्रवेश करती हैं तो समाजजन उनकी अगवानी में पलक पांवड़े बिछाए तैयार थे। पारसनाथ जिनालय पहुंच कर माताजी ने मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान के दर्शन किए। अजीत कोठिया ने बताया कि माताजी के संघ में आर्यिका करणमती माताजी, आर्यिका गरिमामती माताजी तथा ब्रह्मचारिणी सोनल दीदी भी डडूका पधारीं। ऐतिहासिक डडूका नगरी में अपने प्रथम प्रवचन में ही यहां के जैन समाज की भक्ति से प्रभावित होकर माताजी ने आदिनाथ जन्म तप कल्याणक पर्व मनाने की घोषणा कर दी। हमारे तो मानो भाग ही खुल गए। अपने प्रातः कालीन प्रवचनों की श्रृंखला में माताजी ने आलोचना पाठ पर प्रातः 8से 9बजे तक वो तत्व गंगा बहाई, जिसमें हमारी कई अनसुलझी बातों और शंकाओं का स्वतः ही समाधान निकल आया।
पार्श्वनाथ भगवान का जलाभिषेक करवाया
आर्यिका पवित्रमति जी की वाणी में वो सम्मोहन है कि क्या युवा, क्या बुजुर्ग, क्या बच्चे, क्या बहनें सब के सब उनकी जिनवाणी मय वाणी से चुंबकीय आकर्षण की तरह जुड़ गए। अजीत कोठिया ने बताया कि दोपहर में माताजी ने बहनों के लिए पृथक से कक्षा लगाई। शाम प्रतिदिन 6.30से 7.30बजे तक कथा आर्यिका गरिमा मति माताजी ने सुनाई तो श्रोताओं को प्रथमानुयोग से सराबोर कर दिया। प्रतिदिन प्रातः गर्भ गृह के मूलनायक पार्श्वनाथ भगवान का जलाभिषेक माताजी करणमति ने मंत्रोच्चार से इस तन्मयता से कराया कि बच्चे, युवा, बुजुर्ग सब के सब जुड़ गए। आदिनाथ जन्म तप कल्याणक पर्व पर माताजी पवित्रमतिजी ने पार्श्वनाथ सभागार में आदिनाथ विधान कराया। जिसमें समाजजनों ने भक्ति से हिस्सा लिया।
वर्षायोग के लिए किए श्रीफल भेंट
अगले ही दिन पार्श्वनाथ विधान कराया तो भक्ति की चमक और बढ़ गई। अपने प्रवास के दौरान माताजी ससंघ सानिध्य में डडूका में तीर्थंकर अनंतनाथ भगवान एवं अरहनाथ भगवान के मोक्ष कल्याणक पर्व पर निर्वाण लाडू अर्पित किए गए। आंजना, परतापुर और आदिनाथ कॉलोनी एवं नौगामा के भक्तों का भी डडूका आना-जाना लगा रहा। पवित्रमति माताजी की चर्याएं चतुर्थकाल के साधुओं जैसी है और वे ऐसी साध्वी हैं। जिन्हें प्रचार-प्रसार और मीडिया का कोई मोह नहीं है। वे सिर्फ और सिर्फ धर्म वृद्धि और तत्त्व चर्चा की ही पक्षधर हैं। जैन समाज डडूका की हार्दिक इच्छा है कि पवित्रमति माताजी का वर्षा योग 2025 का सौभाग्य हमें मिले। इसके लिए समाजजनों ने उन्हें श्रीफल भेंट कर विनती की। गांगड़ तलाई में प्रवास कर रही उनकी गुरु मां विज्ञानमति माताजी से भी निवेदन करने जैन समाज का प्रतिनिधि मंडल पहुंचा। सभी ये उम्मीद करते हैं कि माताजी के चतुर्मास का सौभाग्य डडूका को मिले।
परतापुर की ओर विहार में शामिल रहे जैन समाज के भक्त
प्रवास के तेरहवें दिन माताजी ने प्राचीन मनोहारी जिनालय डडूका के प्रांगण में एक बार और पार्श्वनाथ विधान कराया। फिर परतापुर की ओर शाम 4.30बजे विहार कर र्गइं। भक्तों की आंखें आंसुओं भरी थीं। सभी भक्त परतापुर तक वाया खेरन का पारड़ा विहार में सम्मिलित हुए। माताजी को परतापुर तक विहार करा परतापुर जिनालय के मूलनायक नेमीनाथ भगवान और अतिशययुक्त बेड़वा वाले बाबा आदिनाथ भगवान के दर्शन कर मां पवित्र मति माताजी का आशीर्वाद लेकर हम डडूका बड़े भारी मन से लौटे। माताजी के मांगलिक सानिध्य में बीते ये तेरह दिन हम सब की अनमोल थाती हैं। दिगंबर जैन पाठशाला के बच्चे सोनल दीदी द्वारा दिए गए तत्वज्ञान और व्यावहारिक ज्ञान को जीवन में अपनाने को संकल्प बद्ध हैं। हमें भविष्य में भी ऐसे संतों, साध्वियों का सानिध्य मिलता रहे, जो हमारे जीवन पथ को आलोकित करता रहे।
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