श्रीजी की रिद्धि मंत्रों से शांतिधारा की अष्टाहिका पर्व पर 8दिनों में 1024 अर्घ्यों से सिद्ध भगवान की आराधना की गई। अनुष्ठान में श्रीजी की रिद्धि मंत्रों के साथ वृहद शांतिधारा की गई। सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्धचक्र का ध्यान लगाते हुए ग्रंथों से श्रीपाल भूप को सुख मिला। दाहोद से पढ़िए यह खबर…
दाहोद। महावीर नगर जैन श्री शांतिनाथ जिनालय के तत्वावधान में अष्टह्निका पर्व फाल्गुन सुदी अष्टमी से पूर्णिमा तक अष्टह्निका पर्व मनाया गया। इस अवसर पर श्री सिद्धचक्र महामंडल विधान महावीर नगर के सदस्यों ने नव निर्मित जिनालय में किया। शुक्रवार अष्टह्निका के अंतिम दिन 128 अर्घ्य से सिद्ध भगवान की विशेष आराधना हुई। अनुष्ठान में श्रीजी की रिद्धि मंत्रों के साथ वृहद शांतिधारा की गई। मंडल पर आठों दिशाओं के आठ विशेष अर्घ्य चढ़ाने का सौभाग्य मिला।
128 अर्घ्यों से सिद्ध भगवान की आराधना
सिद्ध परमेष्ठी 108 प्रकार के पापों से मुक्त होते हैं। इसी भावना के साथ 128 अर्घ्यों के माध्यम से सिद्ध भगवान की आराधना की गई। सिद्धचक्र महामंडल विधान में सिद्धचक्र का ध्यान लगाते हुए ग्रंथों से श्रीपाल भूप को सुख मिला। कुष्ठ मिटाकर मैना ने यश और सुख पाया। जिनवाणी का अध्ययन करते हुए प्रभु की भक्ति शुद्ध भाव से की। किसी कामना या प्रयोजन से नहीं। तब जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और फल प्राप्त होते हैं।
तपाराधना कर पुण्य संचय
महावीर नगर वासियों ने सुबह शांतिनाथ भगवान का अभिषेक शांतिधारा की। विधान में प्रतिदिन दिन 50 से अधिक श्रावक-श्राविकाओं ने पूजा-अर्चना साधना की। तपाराधना कर पुण्य संचय कर रहे हैं। शाम को प्रतिदिन महाआरती का लाभ समाज जन ले रहे हैं।
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