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जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है

दीक्षार्थी बहनों की बिंदोली निकाल गोद भराई की गई

सनावद@ सन्मति जैन। जीवन के किसी भी क्षण में वैराग्य उभर सकता है। इस सुक्ति वाक्य को चरितार्थ करती तपस्वियोंं की नगरी सनावद से दो बेटियां त्याग और संयम के वैराग्य पथ की ओर अग्रसर हो रही है। यह पथ बहूत ही कठिन ओर मुश्किलों से भरा है । इस पथ पर निरंतर आगे बढें यही मंगल कामना है।
सन्मति जैन काका ने बताया की राष्ट्रसंत वात्सल्य वारिधी जिनधर्म प्रभावक नगर के गौरव पंचम पट्टाधीश आचार्य रत्न श्री 108 वर्धमान सागर जी महाराज के द्वारा 5 भव्य जैनेश्वरी दिक्षा राजस्थान प्रांत के अतिशय क्षेत्र महावीर जी की पुण्य धरा पर दिनांक 5 अक्टूबर 2022 विजयदशमी के अवसर पर होगी।
इस अवसर पर गुरुवार को सनावद जैन समाज को दीक्षार्थी बहनों की बिंदौली एवम गोद भराई करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। शाम को श्री दिगम्बर जैन पाश्र्वनाथ बड़ा जैन मंदिर से बिंदौली निकाली गई जो नगर के मुख्य मार्गो से होती हुई जैन धर्मशाला में धर्मसभा के रूप में सम्पन हुई। कार्यक्रम में अनेक शहरों से पधारे अतिथि महेंद्र जैन बेडिय़ा, अशोक झांझरी भीकनगांव, गौरव जैन खंडवा, संजय जैन बड़वाह, शैलेंद्र जैन कसरावद के द्वारा आचार्य वर्धमान सागर जी महाराज के चित्र के समक्ष दीप प्रज्जवलन किया गया। तत्पश्चात संगीता पाटोदी के द्वारा मंगलाचरण किया गया। अगली कड़ी में राजेन्द्र महावीर,,सुनीलजैन, वारिश जैन,संगीता पाटोदी डॉ.राहुल के द्वारा दीक्षार्थीयों के प्रति अपने भाव प्रकट किए गए। दीप्ति दीदी ने कहा कि संसार मार्ग ओर मोक्ष मार्ग ये दो मार्ग होते हैं। हमने मोक्ष मार्ग अपनाया और आज हम दीक्षा लेने की ओर अग्रसर हो रहे हैं। संसार में जीव दो प्रकार के हैं। संसारी जीव मुक्त जीव है जो आठ कर्मों का नाश करके सिद्धशिला में विराजमान है और संसारी जीव आठ कर्मो से लिप्त है। हम सभी को आठ कर्मों से मुक्त होने और संसार से पार होने के लिए संयम धारण करना ही पड़ता है। जो हमने धारण किया है। संयम धरण किए बिना कर्म निर्जरा नहीं होती है। कर्म निर्जरा के बिना केवल ज्ञान नहीं होता है । इस लिए जीव को दोनों कर्मों नाश कर के आत्मा का कल्याण करना है।

कार्यक्रम में दीक्षार्थी बहनों के परिवारजनों का हार व श्रीफ़ल देकर सम्मान किया गया । इसी बीच प्रदीप पंचोलिया, आदित्य पंचोलिया, संगीता पाटोदी भजन प्रस्तुत किये। सकल जैन समाज मुनित्यागी समिति व आचार्य श्री वर्धमान सागर युवा संघ व बहुमंडल की ओर से दीक्षार्थी बहनों को स्मृति स्वरूप सम्मान पत्र दिये गये। इनका वाचन इंजीनियर मनोज जैन,अनुभव जैन, प्रियंका जैन ने किया। इस अवसर पर बेडिय़ा बड़वाह, कसरावद, बालसमुंद, खंडवा, इंदौर भीकनगांव सहित कई स्थानों के लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम का संचालन प्रशांत चौधरी ने किया।

Óब्रह्मचारिणी दीप्ति दीदी का परिचयÓ
12 सितंबर 1996 को श्रीमती भारती-अविनाश जैन सनावद के परिवार में जन्म लेने वाली दीप्ति दीदी की शिक्षा बीबीए ( प्रथम वर्ष ) रही है। आपको धार्मिक शिक्षा अपनी माता और दादी से प्राप्त हुई। वहीं बुआजी आर्यिका श्री चैतन्यमती माताजी से प्रेरणा मिली। बा.ब्रह्मचारिणी दीप्ति दीदी ने 12 अगस्त 2015 में आजीवन शुद्ध जल का नियम लेकर लेकर निवाई में 22 अगस्त 2015
को श्री वद्र्धमान सागर जी से आजीवन ब्रहचर्य व्रत धारण किया

ब्रह्मचारिणी साधना दीदी का परिचय
4 जुलाई सन 1962 को स्व लीलावति पंचोलिया और श्री त्रिलोक चंद जी सराफ (क्षपक मुनि श्री चारित्र सागर जी सन 1993 से सन 2002) के यहां साधना दीदी ने जन्म लिया। दादी एवम जन्म दाता माता से धार्मिक शिक्षा प्राप्त करने वाली साधना दीदी की लौकिक शिक्षा हायर सेकेंडरी है। आपका विवाह ( स्व )श्री शरद जी कंठाली महेश्वर से हुआ। आपके एक पुत्र व एक पुत्री है। आपने 7 दिसंबर 2016 को आचार्य श्री वद्र्धमान सागर जी के संघ में शामिल होने का संकल्प लिया। विगत वर्षों से आचार्य श्री संघ में है। आजीवन शुद्ध जल का नियम वर्ष 2001 में मुनि श्री चारित्र सागर जी से, 15 जुलाई 2021को 2 प्रतिमा कोथली कर्नाटक में एवं आजीवन ब्रहम्चर्य व्रत सन 2017 श्रवण बेलगोला में तथा 29 अगस्त 2022 को 7 प्रतिमा श्री महावीर जी में वात्सल्य वारिधि आचार्य श्री वद्र्धमान सागर जी से धारण की।

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