सेहत की बात के इस अंक में हम बात करेंगें, हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी में इस्तेमाल रहे उस सामान की, जिसके बिना हमारा काम नहीं चलता । लेकिन जाने-अनजाने में कहीं हम इन सामानों की आड़ में अपने घर में बीमारियों को न्यौता तो नहीं दे रहे। हानिकारक कैमिकल वाले सामानों का कैसे लगाएं पता, कैसे ख़रीदने से पहले करें जांच, पढ़िए विस्तार से…
सेहत के नाम पर साबुन, तेल, शैम्पू, टूथपैस्ट में खतरनाक केमिकल्स हमारे घर में रोज़ इस्तेमाल हो रहे हैं । इनके इस्तेमाल से कैंसर, अस्थमा, चर्म रोग,किड़नी फैलियर जैसे मामले बहुत बढ़ गए हैं।
हेयर ऑयल, लिप्सटिक, आइलाइनर, मॉश्चराइजर, क्रीम में ब्यूटिलेटेड हाइड्रॉक्साइनिसोल (बीएचए ) होता है। ये पेट के कैंसर, किडनी सेल्स खराब करने और प्रजनन प्रक्रिया पर असर डालते हैं। अब जब भी ऐसे पर्सनल केयर उत्पाद खरीदें तो यह जरूर देख लें कि किस ब्रांड में खतरनाक केमिकल का स्तर क्या है।
सौंदर्य उत्पादों से हो सकता है आपको यह नुक़सान
कई कंपनियां कॉस्मेटिक्स, हेयर स्ट्रेटनर्स, नेल पॉलिश, शैंपू, बेबी सोप में पैराफॉर्मेल्डिहाइड केमिकल का अब भी इस्तेमाल कर रही हैं। अमेरिका सहित कई देशों में इस केमिकल पर पाबंदी लगी है।इसके लंबे समय तक इस्तेमाल करने से आंखों में जलन, नाक-कान में खुजली और गले का कैंसर भी हो सकता है। इसी तरह, इंटरनेशनल फ्रेगरेंस एसोसिएशन के अनुसार, जिन परफ्यूम में बेंजोफिनोन, बीएचए, नेप्थालीन और पैथालेट्स केमिकल का ज्यादा इस्तेमाल किया गया हो उन परफ्यूम से दूरी बनाने को कहा जा रहा है। त्वचा संबंधी रोगों में, एक्जिमा, सांस से जुड़ी बीमारियां जैसे अस्थमा, चर्म रोग और महिला-पुरुषों में प्रजनन क्रिया को नुकसान पहुंचाता है।
टूथपेस्ट में भी ख़तरनाक कैमिकल्स का इस्तेमाल
पैराबेन जैसे केमिकल से ब्रेस्ट कैंसर अपने टूथ पेस्ट, फेश वॉश, शैंपू, कंडीशनर और दूसरे कॉस्मेटिक्स में देखिए कि पैराबेन कम्पाउंड, प्रोपी पैराबेन और मीथाइल पैराबेन जैसे घातक केमिकल का इस्तेमाल किस मात्रा में किया गया है।महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर, पुरुषों में प्रजनन प्रक्रिया पर असर और हॉर्मोन्स में बदलाव की शिकायतें आ रही हैं।
बालों को रंगने में भी कम जोखिम नहीं
बालों को रंगने में बेहद खतरनाक केमिकल फीनाइलिनडायामिन का हेयर डाई में इस्तेमाल हो रहा है। रंगहीन लिक्विड टॉलूइन, जिसे क्रूड ऑयल, नेल पेंट, नेल पेंट रिमूवर और गोंद में इस्तेमाल हो रहा है। रिसर्च बताती है कि यह नर्व सिस्टम को नुकसान पहुचाता है, जिससे बहरापन, अंधापन, एकाग्रता में कमी, यादाश्त जाने की दिक्कत आ रही हैं । कोलंबिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉक्टर अमि जोटा के मुताबिक, कॉस्मेटिक्स और केमिकल वाले उत्पाद खरीदने से बचें। अगर खरीद रहे हैं तो पैकिंग पर जरूर देख लें कि इनकी मात्रा कितनी है और खतरनाक होने की किस कैटेगरी में आते है।
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